अतिथि देवो भव 

अतिथि देवो भव 

ललित शंकर हरिद्वार

वेसे तो भारत की कई परम्पराए प्रसिद्ध है।लेकिन एक परम्परा की चर्चा पूरे विश्व मे हो रही है।वो है अतिथि देवो भव यानी मेहमान भगवान होता है।अभी भारत मे हुए ब्रिक्स  सम्मेलन में  भारत के आतिथ्य सत्कार की प्रशंसा दुनियाभर के लोगों ने की।वो प्रसंशा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि  ब्रिक्स देशों के प्रमुख नेताओं के स्वागत व सत्कार को करना तो सामान्य बात है।,वो तो हर देश करता ही है।लेकिन इस ब्रिक्स सम्मेलन में विदेश से अन्य जो भी कोई आया उसके लिए जो व्यवस्था भारत सरकार ने की उसकी चर्चा सर्वत्र हो रही है।इनमें विश्वरभर के पत्रकार भी शामिल हैं। इन विदेशी पत्रकारों ने अपने अपने समाचार पत्रों में अपने आतिथ्य सत्कार की जानकारी विश्व को देते हुए कहा है कि एक अरब से भी अधिक आबादी वाले भारत में कभी ऐसा एहसास ही नही हुआ कि वे अपने घर से दूर हैं।टीवी ब्रिक्स अफ्रीका की मेलिसा हालो ने कहा कि शिखर सम्मेलन से पहले मंदिरों के दर्शन और स्थानीय सैर के दौरान उन्हें अद्भुत शांति का अनुभव हुआ,करोड़ो लोगो की आबादी के बीच उन्हें ज़रा भी अजनबीपन महसूस नही हुआ,भारत के लोग बहुत मददगार हैं,इसी मीडिया संस्थान के  शाद्रक हालो ने भारत के व्यजनों तथा  स्नेहपूर्ण भोजन कराने  की जमकर तारीफ की,खलीज टाइम्स की वरिष्ठ पत्रकार आलिया मोहम्मद ओबेद अली अलध धनहानि ने भी भारत के आतिथ्य की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि मैने कंही ऐसा स्वागत नही देखा,मलेशिया की पत्रकार यास्मीन नताशा तो भारत के आतिथ्य सत्कार को देखकर हैरान  हो गई । भारत के इस आतिथ्य सत्कार ने विश्व को बताया है कि हम कैसे हैं।भारत जंहा शक्ति में,विदेशनीति में,वैशिवक व्यापार जगत ने ,आर्थिक उन्नति में आगे बढ़ रहा है।ऐसे में विश्वपत्रकार जगत में आतिथ्य की चर्चा कंही न कंही हमारे वैश्विक स्तर पर बढ़ते कदमों में सहायक सिद्ध होगा।अतिथि को भगवान मानने की परंपरा दुनिया मे केवल भारत की ही है।भारत के गरीब से गरीब व्यक्ति भी अतिथि के आने पर खुशी से झूम जाता है।उसके लिये ऋण लेकर भी अच्छी से अच्छी व्यवस्था करता है।,पहले घर के मुख्य द्वार पर लिखा होता था कि अतिथि देवो भव।लेकिन पश्चिम संभ्यता को अपनाने की होड़ के कारण परिवारो में हमारी इस परम्परा में हल्की सी गिरावट  आई है।ब्रिक्स सम्मेलन में दुनियाभर में हो रही आथित्य सत्कार की चर्चा कंही न कंही हमे प्रेरणा भी देगी की हम अपने परिवारों में इस परंपरा को बनाये रखें।जिससे आने वाली पीढ़ी को भी इस परम्परा से जोड़ा जा सके।कभी हमे सबसे कम आंकने वाला विश्व आज हमारी हर बात का समर्थन करता है।हमारी परंपराओ का गुणगान करता है,इसके पीछे मुख्य कारण हमारी विश्व स्तर पर उभरती छबि भी है।क्योंकि कमजोर का कोई गुणगान नही करता।सम्मान पाने के लिये शक्तिशाली होना भी परम आवश्यक है।उसी दिशा में भारत के  कदम बढ़ रहे हैं।ब्रिक्स सम्मेलन 2026 ने  कंही न कंही भारत की शक्ति का, व्यवस्था का,व्यवहार का,विदेशनीति का अहसास दुनिया को कराया है।जो भारत के लिए शुभ संकेत है।

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