भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा विविधतापूर्ण सामाजिक परिवेश और लोक आस्था का प्रतीक है –  कुम्भ मेला 

भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा विविधतापूर्ण सामाजिक परिवेश और लोक आस्था का प्रतीक है –  कुम्भ मेला  सतीश शर्मा  कुंभ मेले का इतिहास इतिहास लिखने की परंपरा से भी बहुत पुराना है, कुंभ मेला हिंदू धर्म का एक महापर्व है | यह एक ऐसा सम्पूर्ण धार्मिक आयोजन है जिसमें खगोल विज्ञान, ज्योतिष, आध्यात्मिकता, अनुष्ठानिक परंपराओं, […]

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खरमास,मलमास क्या होते क्यू होते है

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खरमास,मलमास क्या होते क्यू होते है   15 दिसंबर 2024 से खरमास शुरू होने वाले हैं जो 14 जनवरी, 2025 को समाप्त होगा। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास का महीना प्रारंभ हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास माह के शुरू होने पर सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य

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मानवाधिकार किसी भी सभ्य समाज के  विकास का मूल आधार

मानवाधिकार किसी भी सभ्य समाज के  विकास का मूल आधार विश्व मानवाधिकार दिवस,10 दिसम्बर 2024,पर विशेष  तपन कुमार सह क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पश्चिमी उत्तर प्रदेश  मानव अधिकारों से तात्पर्य मानव के उन न्यूनतम अधिकारों से है जो प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यक रूप से प्राप्त होने चाहिए, मानव अधिकारों का सम्बन्ध मानव की स्वतंत्रता, समानता एवं

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रत्ती का पोधा, बढ़े काम का

रत्ती का पोधा, बढ़े काम का  “रत्ती” यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है। जैसे – रत्ती भर भी परवाह नहीं, रत्ती भर भी शर्म नहीं, रत्ती भर भी अक्ल नहीं…!! आपने भी इस शब्द को बोला होगा, बहुत लोगों से सुना भी होगा। आज जानते हैं ‘रत्ती’ की वास्तविकता, यह आम बोलचाल

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बुढ़ापे में बच्चों का साथ कितना जरूरी

बुढ़ापे में बच्चों का साथ कितना जरूरी विजय मारू आज एक पत्रकार के ट्विटर पोस्ट पर नजर गई और पढ़कर मन बहुत विचलित हो गया। पत्रकार ने लिखा कि उसे एक अस्सी वर्षीय व्यक्ति मिले जिनकी पत्नी का स्वर्गवास दस वर्ष पूर्व हो चुका था। उस बुजुर्ग के दोनो बच्चे अमेरिका में रहते है। पुत्र

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मसाले वाली चाय

मसाले वाली चाय  बालेश्वर गुप्ता, नोयडा         आज सुबह सो कर उठने के बाद से ही आशुतोष जी बड़े खिन्न से थे।असल मे उन्हें सुबह सुबह ब्रश करने के तुरंत बाद चाय पीने की आदत थी,आदत क्या तलब थी,मसाले वाली चाय पीने मात्र से ही वे अपने मे स्फूर्ति महसूस करते थे।अपने समय मे अच्छी पर्सनालिटी

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उत्पन्ना एकादशी

उत्पन्ना एकादशी उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। एकादशी का व्रत रखने वाले दशमी के दिन शाम को भोजन नहीं करते हैं। एकादशी के दिन ब्रह्मावेला में भगवान कृष्ण की पुष्प, जल, धूप, अक्षत से पूजा की

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प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें

प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें गंगा, नदी नहीं मां है और हमारी संस्कृति है – पद्मश्री उमाशंकर पांडेय जलवायु परिवर्तन से बदल रहा मौसम का मिजाज,पंच परिवर्तन के पांच सूत्रों पर हुआ मंथन  प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में नोएडा के सेक्टर 12 स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श 2024’

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नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ से हुआ  प्रेरणा विमर्श 2024 का शुभारंभ

नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ से हुआ  प्रेरणा विमर्श 2024 का शुभारंभ 108 वेदियों में हुआ राष्ट्र कल्याण के लिए यज्ञ,2020 में शुरू हुए प्रेरणा विमर्श की यात्रा निरंतर जारी है नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ की आहुति के साथ प्रेरणा विमर्श 2024 का श्रीगणेश हो चुका है। सेक्टर 12 स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के

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महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – अयि गिरिनन्दिनि 

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – अयि गिरिनन्दिनि  अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवर विन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि

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