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ये कौन सी साइंस है ?

ये  कौन सी साइंस है ? किशन लाल शर्मा कला और विज्ञान के विषय में एक विशेष अंतर यह है कि विज्ञान प्रत्यक्ष प्रमाण के साथ अपने सिद्धांतों  (प्रिन्सिपल्स) को   आपकी आँखों के समक्ष सिद्ध करता है।  यह बात कला के विषयों में नहीं है। कला का क्षेत्र भावनात्मक गूढ अदृश्य विचारों   का प्रकटीकरण है। […]

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संकल्पबद्ध होकर त्याग व परिश्रम से भारत को परमवैभव संपन्न बनाना है।

संकल्पबद्ध होकर त्याग व परिश्रम से भारत को परमवैभव संपन्न बनाना है।   डॉ. मोहन भागवत,सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जितना लंबा गुलामी का यह कालखंड था, उतना ही लंबा और कठिन संघर्ष भारतीयों ने स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु किया. भारतीय जनता का विदेशी सत्ता के विरुद्ध यह संघर्ष भौगोलिक दृष्टि से सर्वव्यापी था. समाज के सब

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बौद्धिक अराजकता को मुख्यधारा में लाने का प्रयास

बौद्धिक अराजकता को मुख्यधारा में लाने का प्रयास  तपन कुमार  सत्य का सवाल नहीं, बल्कि सत्ता और संरक्षण का नुकसान है जो प्रख्यात मार्क्सवादी इतिहासकारों से असहिष्णुता का आरोप लगाने को प्रेरित करता है। मार्क्सवादियों ने पुरातत्व या भूविज्ञान में अपने स्वयं के शोध के कारण नहीं, बल्कि मुख्य रूप से राजनीतिक आधार पर अपने

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भारत को जाने

भारत को जाने  सतीश शर्मा ( केशव भाग संघ चालक नोएडा महानगर ) पुण्य भूमि मानचित्र परिचय  यह देव भूमि है – यहाँ तैंतीस करोड़ देवता रहते थे अर्थात् जितनी जनसंख्या उतने ही देवता । प्रत्येक व्यक्ति धर्म के अनुसार आचरण करता था इसलिए देवतुल्य अर्थात् देव भूमि है यह। दूसरी बात- एक बार राक्षसों

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आओ नवयुग की प्रतिमा में करें प्रतिष्ठा प्राण की।

आओ नवयुग की प्रतिमा में करें प्रतिष्ठा प्राण की। सतीश शर्मा, संयोजक भारतीय इतिहास व ज्योतिष अनुसंधान संस्थान  ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ तेरा तेरा मेरा मेरा तू मर जाए सारा मेरा, कौवा कौवा स्याही ला दो आने की स्याही ला आधी

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गोवा मुक्ति आंदोलन ,भारतीय जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान

गोवा मुक्ति आंदोलन ,भारतीय जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान सतीश शर्मा 13 जून, 1955 को कर्नाटक से भारतीय जनसंघ के नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक जगन्नाथ राव जोशी ने गोवा सत्याग्रह की शुरुआत की.जोशी के साथ वहां लगभग 3000 कार्यकर्ताओं का एक दल गया था, जिसमें महिलाएं भी शामिल थी.गोवा की

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‘सांस्कृतिक मार्क्सवाद’ सॉफ्ट पॉवर कोलोनाइजेशन का हथियार

‘सांस्कृतिक मार्क्सवाद’ सॉफ्ट पॉवर कोलोनाइजेशन का हथियार शिवेश प्रताप  (लेखक IIM कलकत्ता से शिक्षित, लेखक व लोकनीति विश्लेषक हैं)  2004 में टाइम पत्रिका के दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में एक प्रसिद्ध ब्रिटिश-अमेरिकी इतिहासकार नियाल फर्गुसन ने कहा है,  “सॉफ्ट पावर बहुत शांत होता है। हमें सेना या आर्थिक हार्ड पावर को प्रयोग करने

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मानवाधिकार किसी भी सभ्य समाज के  विकास का मूल आधार

मानवाधिकार किसी भी सभ्य समाज के  विकास का मूल आधार विश्व मानवाधिकार दिवस,10 दिसम्बर 2024,पर विशेष  तपन कुमार सह क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पश्चिमी उत्तर प्रदेश  मानव अधिकारों से तात्पर्य मानव के उन न्यूनतम अधिकारों से है जो प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यक रूप से प्राप्त होने चाहिए, मानव अधिकारों का सम्बन्ध मानव की स्वतंत्रता, समानता एवं

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रत्ती का पोधा, बढ़े काम का

रत्ती का पोधा, बढ़े काम का  “रत्ती” यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है। जैसे – रत्ती भर भी परवाह नहीं, रत्ती भर भी शर्म नहीं, रत्ती भर भी अक्ल नहीं…!! आपने भी इस शब्द को बोला होगा, बहुत लोगों से सुना भी होगा। आज जानते हैं ‘रत्ती’ की वास्तविकता, यह आम बोलचाल

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बुढ़ापे में बच्चों का साथ कितना जरूरी

बुढ़ापे में बच्चों का साथ कितना जरूरी विजय मारू आज एक पत्रकार के ट्विटर पोस्ट पर नजर गई और पढ़कर मन बहुत विचलित हो गया। पत्रकार ने लिखा कि उसे एक अस्सी वर्षीय व्यक्ति मिले जिनकी पत्नी का स्वर्गवास दस वर्ष पूर्व हो चुका था। उस बुजुर्ग के दोनो बच्चे अमेरिका में रहते है। पुत्र

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