औरत
औरत नोरीन शर्मा सीखती रही वो,गर्दन नीची कर,पढ़ने जाना.. मौन का टेप,मुँह पे चस्पा कर ,किसी से नज़र न मिलाना हँसते हुए ,आवाज़ और दंतपंक्ति पर,अंकुश लगाना बहुत होनहार विद्यार्थी थी वो,झट से ससुराल के नियम क़ायदे सीख गुणवती बहू,कहलाने लगी..!! दिन बीते,वर्ष बीते,पचास पार,दो बहुओं की सास बनी…! रसोई सौंप,वो भी गंगा नहाने ,अपने …





