नोरीन शर्मा

मन – पंछी (लघुकथा)

मन – पंछी (लघुकथा) नोरिन शर्मा फ़ैमिली कोर्ट से अकेली बाहर निकलकर मान्या कॉलेज पहुँची। पहली दो सुनवाई तक तो माँ साथ हुआ करती थीं पर अब भाभी और उनके बदलते व्यवहार ने उसकी टीस और बढ़ा दी।  शादी के बाद मान्या एक एक पैसे को बचाकर सुकांत के साथ मिलकर एक घर खरीदना चाहती …

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औरत

औरत नोरीन शर्मा सीखती रही वो,गर्दन नीची कर,पढ़ने जाना.. मौन का टेप,मुँह पे चस्पा कर ,किसी से नज़र न मिलाना  हँसते हुए ,आवाज़ और दंतपंक्ति पर,अंकुश लगाना बहुत होनहार विद्यार्थी थी वो,झट से ससुराल के नियम क़ायदे  सीख  गुणवती बहू,कहलाने लगी..!! दिन बीते,वर्ष बीते,पचास पार,दो बहुओं की सास बनी…! रसोई सौंप,वो भी गंगा नहाने ,अपने …

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ख़ुद से मुलाक़ात 

A lone traveler stands on a hilltop, gazing over a vast mountain landscape under a clear blue sky.

ख़ुद से मुलाक़ात  नोरीन शर्मा आज शीतल और वरुण की पच्चीसवीं शादी की सालगिरह है। वरुण ने न तो कभी जन्मदिन मनाया और न ही कभी शादी की सालगिरह…! अंग्रेज़ों के चोंचले कहकर उस दिन ऑफिस को निकल जाता। शीतल की कॉलेज की चंडाल चौकड़ी में से तीन सहेलियों की इसी वर्ष सिल्वर जुबिली है। …

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