सनातन चेतना का जीवंत उत्सव है यात्रा
सनातन चेतना का जीवंत उत्सव है यात्रा गोविन्द विश्वास, चित्रकार, गुजरात भारतीय सभ्यता केवल इतिहास नहीं है, वह एक निरंतर प्रवाहित होती चेतना है। इस चेतना का सबसे उज्ज्वल, सबसे लोकमंगलकारी और सबसे मानवीय स्वरूप भगवान श्रीराम हैं। श्रीराम किसी एक काल, किसी एक भूभाग या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं; वे भारतीय …













