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कन्याकुमारी यात्रा – विवेकानंद शिला

कन्याकुमारी यात्रा – विवेकानंद शिला लगभग  131 साल पहले सम्पूर्ण देश में घूमता हुआ एक भ्रमणशील संन्यासी भारत के दक्षिणी अंतिम छोर पर पहुंचा जहाँ पर प्राचीनकाल से भगवती कन्याकुमारी का शक्तिपीठ स्थित है। संन्यासी माँ के चरणों में गिर पड़ा। वहीं समुद्र में दो चट्टानें हैं जो भूमि से अलग हो गई हैं। शिला […]

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निर्णायक क्षण – एक गलती से सदियों को सजा मिलेगी

निर्णायक क्षण – एक गलती से सदियों को सजा मिलेगी तरुण विजय सही और गलत के मध्य बारीक धागे सा अंतर होता है लेकिन एक  सही निर्णय यदि राष्ट्र  का निर्माण  करता है तो उसी  क्षण लिया गलत फैसला   उस देश के लोगों को सदियों तक सजा देता है. ग़ज़नवी  हज़ार मील दूर से

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एक संन्यासी का शोकगीत 

एक संन्यासी का शोकगीत  भगवत्पाद आचार्य शंकर ने पाँच पञ्चकों (पंचश्लोकी स्तोत्र) की रचना की है – मनीषापञ्चक, साधनापञ्चक, काशीपञ्चक, यतिपञ्चक एवं मातृपञ्चक।  इनमें से आरम्भिक चार की तो चर्चा एवं पारायण साधक-जिज्ञासुजन करते हैं, लेकिन मातृपञ्चक की चर्चा प्रायः कम होती है। इस पञ्चक की रचना आचार्य ने अत्यंत विषम स्थिति में की थी।

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देवर्षि नारद : लोक-कल्याण संचारक और संदेशवाहक

  देवर्षि नारद : लोक-कल्याण संचारक और संदेशवाहक  ‘नारद’ शब्द में ‘नार’ का अर्थ है ‘जल’ तथा ‘अज्ञान’ और ‘द’ का अर्थ है ‘देना’ या ‘नाश करना’। अर्थात जो पितरो को तर्पण द्वारा सदा जल प्रदान करता है, इसलिए नारद नाम पड़ा। दूसरा अर्थ है – अज्ञान का जो नाश कर ज्ञान का प्रकाश दे,

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भगवान परशुराम जी

भगवान परशुरामजी  (वैशाख शुक्ल तृतीया/ प्रकटोत्सव) भगवान परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहां जन्मे थे। जो भगवान विष्णु के छठा अवतार हैं। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से

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श्री रामानुजाचार्य स्वामी पर विस्मयकारी जानकारी 

श्री रामानुजाचार्य स्वामी पर विस्मयकारी जानकारी    पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में गोवा में सेंट जेवियर के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन

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उत्तर पूर्व को हम कितना जानते हैं, मणिपुर से बहुत अलग है मिजोरम की कहानी

उत्तर पूर्व को हम कितना जानते हैं, मणिपुर से बहुत अलग है मिजोरम की कहानी   तरुण विजय  हमारे पास उनके लिए समय नहीं होता। वे क्या सोचते हैं, क्या बोलते हैं, क्या तूफान उनके भीतर चल रहे हैं, इसके लिए किसके पास समय है? मिजोरम के चकमा लोगों ने भेदभाव के विरुद्ध बंदूक, राइफल नहीं

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गुलामी की मानसिकता से मुक्ति

गुलामी की मानसिकता से मुक्ति क्या आप Henry Francis को जानते हैं? कभी आपने क्या Abide with Me गाना  सुना है? घबराइए मत, यदि नहीं सुना है तो क्यूंकि Henry Francis एक स्कॉटिश अंग्रेज पादरी था जिसकी मृत्यु तपेदिक रोग से हुई थी और जब वो अपनी मृत्यु शैय्या पर था तो उसके लिए यह

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राम यानि शुद्ध चेतना

राम यानि शुद्ध चेतना राम जिस चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसके संग होके फिर संसार में व्यक्ति दो ही स्थितियों को प्राप्त होता है। एक तो वह निस्पृह भाव को स्वीकार करता है, यानि बिना किसी अवरोध के चाल-गमन, दूसरा वह इंद्रियों को अपने एकाधिकार में रख, केवल राम के निमित्त कर्म करने की

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इच्छाशक्ति

इच्छाशक्ति  इच्छाशक्ति हमारे स्व और मन की संयुक्त शक्ति है, जो निर्धारित कार्य को निष्कर्ष तक पहुंचाने में सहायक बनती है। जो सही है यह हमें उस पर चलने तथा जो गलत है, उससे बचने की शक्ति देती है। समस्या यह है कि हम अपनी इच्छाशक्ति को बढ़ाने का प्रयास नहीं करते। भाव एवं बुद्धि

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