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हमारा पुरातन इतिहास 

हमारा पुरातन इतिहास  क्या आप जानते हैं कि  हमारे प्राचीन महादेश का नाम “भारतवर्ष” कैसे पड़ा….????? साथ ही क्या आप जानते हैं कि हमारे प्राचीन हमारे महादेश का नाम “जम्बूदीप” था परन्तु क्या आप सच में जानते हैं जानते हैं कि  हमारे  महादेश को “”जम्बूदीप”” क्यों कहा जाता है और, इसका मतलब क्या होता है […]

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश दि 9 नवम्बर 2019 राम मंदिर पर

सुप्रीम कोर्ट  का आदेश दि 9 नवम्बर 2019 राम मंदिर पर  रविंदर रस्तोगी नोएडा 1992 दिसंबर में कार सेवा के दौरान बाबरी ढांचा ध्वस्त हो गया. उसके तुरंत पश्चात भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरसिंघ राव जी ने घोषणा की इसी स्थान पर दुबारा मस्जिद बनवाई जाएगी  परंतु हिंदुओं का हिंदुओं का आक्रोश देखकर वह अपने निर्णय

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भारत का बढ़ता आत्म विश्वास 

भारत का बढ़ता आत्म विश्वास  2001 की बात है जॉर्ज बुश एक स्कूल में सम्बोधित कर रहे थे। अचानक उसके कान में उनका गार्ड आकर कुछ बताता है। वो सुनते हैं और वापिस अपनी स्पीच देने लगते हैं। बाद में पता चलता है कि गार्ड ने उन्हें बताया था कि अमेरिका पर 9/11 हमला हो

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सास,बहु,बेटी ओर माँ 

सास,बहु,बेटी ओर माँ  लड़कियों को हमेशा ये शिकायत है कि हमको ससुराल में बेटी नही समझा जाता। पहले ये जानना जरूरी है कि बेटी थी तब क्या रोल था आपका घर में..आप आराम से उठती थी देर तक सोती रहती थी,खाना चाय नाश्ता सब मम्मी बना देती थी बाकी काम मेड करती थी कभी कभार

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स्व आधारित भारत

स्व आधारित भारत    स्व आधारित भारत यह विषय बहुत व्यापक है, उसको पूरा अगर समझना है तो एक व्याख्यान में बात पूरी नहीं होती है और एक व्यक्ति के बोलने से पूरी नहीं होती| यह तो जानकार और समझदार व्यक्तियों ने जैसे कहते हैं कि कभी नैमिषारण्य में बैठकर ऋषि  मुनियों ने बहुत लंबे

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रिसोर्ट मे विवाह

रिसोर्ट मे विवाह  नई सामाजिक बीमारी,कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियाँ होने की परंपरा चली परंतु वह दौर भी अब समाप्ति की ओर है!अब शहर से दूर महंगे रिसोर्ट में शादियाँ होने लगी हैं! शादी के 2 दिन पूर्व से ही ये रिसोर्ट बुक करा लिया जाते हैं और शादी

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Jaankaarikaal September – 2023

  जानकारी काल     वर्ष-24             अंक-05           सितम्बर – 2023,                  पृष्ठ 50                  मूल्य 2-50       श्री कृष्ण के लिए  समाज एवं राष्ट्र व्यवस्था कर्त्तव्य थी, इसलिये उन्होंने कर्त्तव्य से

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BHARTIYA CHINTAN OR PASHCHATY CHINTAN

भारतीय और पाश्चात्य चिंतन धारा डाॅ मुनीश प्रकाश अग्रवाल जीवन के लक्ष्य के अनुसार ही साधन सुनिश्चित किए जाते हैं। जीवन शैली भी उसी के अनुसार प्रभावित होती है। विश्व में विशेष रुप से दो प्रकार की चिंतन दृष्टि दिखाई देती है एक पाश्चात्य चिंतन और दूसरा भारतीय चिंतन दृष्टि । पाश्चात्य चिंतन का लक्ष्य

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chaand Par Charcha

  चंद्रयान मिशन के महत्वपूर्ण बेला में रजनीश की चर्चा रजत बागची  आज जब हमारा  विक्रम यान चंद्रमा की भूमि पर अपना कदम रखने जा रहा है, और प्रज्ञान के द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक आविष्कार व परीक्षण की बेला आ गई है, अपने इतिहास व संस्कृति के दृष्टिकोण से चंद्रमा को प्रकाशित करने का प्रयत्न  किया

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 विचारों का महत्व    सुमित कुमार,नोएडा महानगर आर्दश विचारों के प्रसार की क्यों आवश्यकता है। आप इसमें अपनी भूमिका कैसे निभा सकते हैं। आज समाज जिस गिरी हुई अवस्था में पहुंच चुका है उसे देख कर यही लगता है कि अब यदि इसे संभालने के प्रयास नहीं किए गए तो समय की चाल हमें गर्त की

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