नियंत्रित भोजन आरोग्य शरीर सतीश शर्मा

नियंत्रित भोजन आरोग्य शरीर  सतीश शर्मा  “जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन” एक लोकप्रिय कहावत है. इसका मतलब है कि हम जो खाना खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे मन पर पड़ता है. स्वस्थ भोजन करने से मन भी शांत और स्वस्थ रहता है. वहीं, जंक फ़ूड खाने से मन पर नकारात्मक असर पड़ता है.स्वस्थ […]

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सामाजिक समता और हिन्दु संगठन : श्री. बालासाहेब देवरस

  सामाजिक समता और हिन्दु संगठन :  श्री. बालासाहेब देवरस संकलन कर्ता सतीश शर्मा  हिन्दु कौन है ? हिन्दु शब्द की व्याख्या क्या है ? इस पर अनेक बार काफी विवाद खड़े किये जाते हैं, ऐसा हम सभी का सामान्य अनुभव है। हिन्दु शब्द की अनेक व्याख्यायें हैं, किन्तु कोई भी परिपूर्ण नहीं है। क्योंकि

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स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के प्रेरक प्रसंग

स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के प्रेरक प्रसंग  सतीश शर्मा आज से 162 साल पहले आज के दिन ही एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ था, जिसे दुनिया स्वामी विवेकानंद के नाम से जानती है। लेकिन 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (नेशनल यूथ डे) के रूप में भी मनाया जाता है। स्वामी

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प्रयागराज में महाकुंभ: आस्था और व्यापार का अनूठा संगम

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  प्रयागराज में महाकुंभ: आस्था और व्यापार का अनूठा संगम   डॉ. परमवीर “केसरी”   राजनीतिक विश्लेषक महाकुंभ मेले की चकाचौंध में छिपी है एक विशाल अर्थव्यवस्था। 13 जनवरी से शुरू हो रहे इस आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। इतिहास गवाह है कि कुंभ मेला सदियों से आस्था और व्यापार

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ये कौन सी साइंस है ?

ये  कौन सी साइंस है ? किशन लाल शर्मा कला और विज्ञान के विषय में एक विशेष अंतर यह है कि विज्ञान प्रत्यक्ष प्रमाण के साथ अपने सिद्धांतों  (प्रिन्सिपल्स) को   आपकी आँखों के समक्ष सिद्ध करता है।  यह बात कला के विषयों में नहीं है। कला का क्षेत्र भावनात्मक गूढ अदृश्य विचारों   का प्रकटीकरण है।

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मकर संक्रान्ति का महत्व व कथा

मकर संक्रान्ति का महत्व व कथा सतीश शर्मा मकर संक्रान्ति (माघ मास की सौर एकम्) – इस दिन भगवान सूर्यनारायण मकर राशि में प्रवेश करते हैं,दक्षिणायन समाप्त होकर उत्तरायण प्रारंभ होता है| संक्रांति के दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि यानी मकर राशि में आते हैं

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पुत्रदा एकादशी

पुत्रदा एकादशी सतीश शर्मा  पौष मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत और अनुष्ठान करने से भद्रावती के राजा सुकेतु को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। तभी से इसका नाम पुत्रदा अर्थात पुत्र देने वाली एकादशी पड़ा। इस दिन

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वर्षफल – 2025

वर्षफल  अपनी राशि के अनुरूप अपना व्यवसायिक वर्षफल जाने  2025 से जानें वर्ष 2025 में आप किस दिशा में जाने वाले  है ? सभी 12 राशियों के लिए वर्षफल को देखें । मेष राशि  मेष राशि के वालों की तो नौकरी में आपको अपेक्षाकृत अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे। इस वर्ष मई के बाद राहु का

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संकल्पबद्ध होकर त्याग व परिश्रम से भारत को परमवैभव संपन्न बनाना है।

संकल्पबद्ध होकर त्याग व परिश्रम से भारत को परमवैभव संपन्न बनाना है।   डॉ. मोहन भागवत,सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जितना लंबा गुलामी का यह कालखंड था, उतना ही लंबा और कठिन संघर्ष भारतीयों ने स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु किया. भारतीय जनता का विदेशी सत्ता के विरुद्ध यह संघर्ष भौगोलिक दृष्टि से सर्वव्यापी था. समाज के सब

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बौद्धिक अराजकता को मुख्यधारा में लाने का प्रयास

बौद्धिक अराजकता को मुख्यधारा में लाने का प्रयास  तपन कुमार  सत्य का सवाल नहीं, बल्कि सत्ता और संरक्षण का नुकसान है जो प्रख्यात मार्क्सवादी इतिहासकारों से असहिष्णुता का आरोप लगाने को प्रेरित करता है। मार्क्सवादियों ने पुरातत्व या भूविज्ञान में अपने स्वयं के शोध के कारण नहीं, बल्कि मुख्य रूप से राजनीतिक आधार पर अपने

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