शैलपुत्री माता की कथा
शैलपुत्री माता की कथा सतीश शर्मा वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूद्धां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम् ।। माँ दुर्गा अपने पहले स्वरूपमें ‘शैलपुत्री’ के नामसे जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालयके वहाँ पुत्रीके रूपमें उत्पन्न होनेके कारण इनका यह ‘शैलपुत्री’ नाम पड़ा था। वृषभ स्थिता इन माताजीके दाहिने हाथमें त्रिशूल और बायें हाथमें कमल पुष्य सुशोभित है। यही नव …













