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कामदा एकादशी कथा व विधि

कामदा एकादशी कथा व विधि  सतीश शर्मा  एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना विशेष महत्व होता है, परंतु चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे कामदा एकादशी कहा जाता है, विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। यह एकादशी हिंदू नववर्ष की […]

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सिद्धिदात्री माता की कथा 

सिद्धिदात्री माता की कथा  सतीश शर्मा सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि । सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ।। माँ दुर्गाजीकी नवीं शक्तिका नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकारकी सिद्धियोंको देनेवाली हैं। मार्कण्डेयपुराणके अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व-ये आठ सिद्धियाँ होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराणके श्रीकृष्ण-जन्मखण्डमें यह संख्या अट्ठारह बतायी गयी है। इनके नाम इस प्रकार हैं-

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कालरात्रि माता की कथा

कालरात्रि माता की कथा  सतीश शर्मा    एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता । लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी ॥ माँ दुर्गाजीकी सातवीं शक्ति कालरात्रिके नामसे जानी जाती हैं। इनके शरीरका रंग घने अन्धकारकी तरह एकदम काला है। सिरके बाल बिखरे हुए हैं। गलेमें विद्युत्‌की तरह चमकनेवाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं।

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कात्यायनी की कथा 

कात्यायनी की कथा  सतीश शर्मा चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ।। माँ दुर्गाके छठवें स्वरूपका नाम कात्यायनी है। इनका कात्यायनी नाम पड़नेकी कथा इस प्रकार है-कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्यके गोत्रमें विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बाकी उपासना करते हुए बहुत वर्षोंतक बड़ी

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स्कन्दमाता की कथा

स्कन्दमाता की कथा  सतीश शर्मा सिंहासनगता नित्यं प‌द्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ।। माँ दुर्गाजीके पाँचवें स्वरूपको स्कन्दमाताके नामसे जाना जाता है। ये भगवान् स्कन्द ‘कुमार  कार्त्तिकेय’ नामसे भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राममें देवताओंके सेनापति बने थे। पुराणोंमें इन्हें कुमार और शक्तिधर कहकर इनकी महिमाका वर्णन किया गया है। इनका वाहन

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कूष्माण्डा माता की कथा 

कूष्माण्डा माता की कथा  सतीश शर्मा सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तप‌द्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥ माँ दुर्गाजीके चौथे स्वरूपका नाम कूष्माण्डा है। अपनी मन्द, हलकी हँसीद्वारा अण्ड अर्थात् ब्रह्माण्डको उत्पन्न करनेके कारण इन्हें कूष्माण्डा देवीके नामसे अभिहित किया गया है। जब सृष्टिका अस्तित्व नहीं था, चारों ओर अन्धकार-ही-अन्धकार परिव्याप्त था, तब इन्हीं देवीने अपने ‘ईषत्’

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चन्द्रघण्टा माता की कथा

चन्द्रघण्टा माता की कथा  सतीश शर्मा पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्वकैर्युता। प्रसादं तनुने महां चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥ माँ दुर्गाजीकी तीसरी शक्तिका नाम ‘चन्द्रघण्टा’ है। नवरात्रि-उपासनामें तीसरे दिन इन्हींके विग्रहका पूजन-आराधन किया जाता है। इनका यह स्वरूप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तकमें घण्टेके आकारका अर्धचन्द्र है, इसी कारणसे इन्हें चन्द्रघण्टा देवी कहा जाता है। इनके शरीरका रंग

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ब्रह्मचारिणी माता

ब्रह्मचारिणी माता  सतीश शर्मा दधाना करपद्‌द्याभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुनमा ।। माँ दुर्गाकी नव शक्तियोंका दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणीका है। यहाँ ‘ब्रह्म’ शब्दका अर्थ तपस्या है। ब्रह्मचारिणी अर्थात् तपकी चारिणी – तपका आचरण करनेवाली। कहा भी है- वेदस्तत्त्वं तपो बहा-वेद, तत्त्व और तप ‘ब्रह्म’ शब्दके अर्थ हैं। ब्रह्मचारिणी देवीका स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है।

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जाने भारतीय काल गणना व पंचांग के बारे में

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जाने भारतीय काल गणना व पंचांग के बारे में  ज्योतिष ज्ञान सतीश शर्मा पंचांग के पांच अंग,तिथि, वार,नक्षत्र, योग व करण,भारतीय मास,राशि,ग्रह व अन्य महत्वपूर्ण विषय।  राशि – राशि जिस प्रकार 12 महीने होते हैं उसी प्रकार 12 राशि होती है। मेष,वृषभ,कर्क, सिंह,कन्या,तुला,वृश्चिक,धनु,मकर,कुंभ व मीन। महीने – 12 महीने निम्नलिखित है। चैत्र,बैसाख,ज्येष्ठ,आषाढ़,श्रावण,भाद्रपद, आश्विन,कार्तिक,मार्गशीष॔,पौष,माघ,फाल्गुन। पक्ष को

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मनोकामना सिद्धि मंत्र व मां दुर्गा के 108 नाम 

मनोकामना सिद्धि मंत्र व मां दुर्गा के 108 नाम  सतीश शर्मा मनोकामना सिद्धि मंत्र  निम्नलिखित मित्रों को जपने से सभी मनोकामना  पूर्ण हो जाती है यहां पर दुर्गा सप्तशती के कुछ मंत्र दिए गए है |  भय-नाश के लिये – सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥  पाप-नाश के लिये– हिनस्ति दैत्यतेजांसि

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