Katha

शैलपुत्री माता की कथा 

शैलपुत्री माता की कथा  सतीश शर्मा वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूद्धां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम् ।। माँ दुर्गा अपने पहले स्वरूपमें ‘शैलपुत्री’ के नामसे जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालयके वहाँ पुत्रीके रूपमें उत्पन्न होनेके कारण इनका यह ‘शैलपुत्री’ नाम पड़ा था। वृषभ स्थिता इन माताजीके दाहिने हाथमें त्रिशूल और बायें हाथमें कमल पुष्य सुशोभित है। यही नव […]

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पापमोचनी एकादशी

पापमोचनी एकादशी सतीश शर्मा यह व्रत चैत्र मास की कृष्ण पक्ष एकादशी का किया जाता है। इसदिन भगवान विष्णु को अर्घ्यदान आदि देकर षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा, फलाहार या निर्जला व्रत करें। अगले दिन (द्वादशी) शुभ समय में पारण करें। पापमोचनी एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा पाने

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महाशिरात्रि का महत्व व कथा

महाशिरात्रि का महत्व व कथा  सतीश शर्मा महाशिवरात्री  भगवान् शिव का अत्यत महत्वपूर्ण व्रत है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का व्रत आता है। शिव’ का अर्थ है कल्याणकारी और ‘रात्रि’ का अर्थ है विश्राम। महाशिवरात्रि वह रात है जब हम शिव तत्व (परम चेतना) की शरण में जाकर गहरा विश्राम पाते हैं। पौराणिक

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मौनी अमावस्या का महत्व व करने योग्य उपाय 

मौनी अमावस्या का महत्व व करने योग्य उपाय  सतीश शर्मा मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक पवित्र और शुभ दिन माना जाता है. यह अमावस्या माघ मास में आती है और इस दिन आध्यात्मिक शुद्धि, संयम और पितृ तर्पण का विशेष महत्व होता है. इस दिन किए गए धार्मिक कर्म और पुण्य कार्य कई गुना

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माघ मास व माघी पूर्णिमा का महत्व व करने योग्य कार्य

माघ मास व माघी पूर्णिमा का महत्व व करने योग्य कार्य सतीश शर्मा माघ मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी महीना है, जिसमें स्नान, दान, तपस्या और भगवान विष्णु/सूर्य/शिव की पूजा का विशेष महत्व है, जो पापों का नाश कर आरोग्य, सुख और समृद्धि दिलाता है, खासकर प्रयागराज में कुंभ स्नान और मकर

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छठ पूजा का महत्व व कथा

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छठ पूजा का महत्व व कथा  सतीश शर्मा सुहाग संतान व समृद्धि  के लिए पूजे  जाने वाला पर्व है छठ पूजा,छठ पूजा को समाजिक समरसता, सद्भाव व  लोक आस्था  का महापर्व कहते है। सूर्य देव और छठी माता की आराधना का पर्व है। यह पर्व चार दिन तक चलता है और इसमें श्रद्धालु न केवल

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होई अष्टमी की कथा

होई अष्टमी की कथा सतीश शर्मा अहोई अष्टमी कथा सुनने के लिए ऊपर लिंक पर  क्लिक करें ।  एक नगर में एक साहू‌कार रहता था जिसके सात बेटे, बहुएं और एक बेटी थी। कार्तिक के महीने में दीवाली से पहले अष्टमी को अपने मकान की लिपाई पुताई करने के लिए सातों बहुएं अपनी इकलौती ननद

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करवा चौथ की कथा व भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार की महिमा

करवा चौथ सतीश शर्मा कथा सुनने के लिए क्लिक करे करवा चौथ व्रत को पति की लंबी आयु, सुहाग की रक्षा और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। करवा चौथ की कहानी एक वीरवती नाम की पत्नी की है, जिसने अपने पति की लंबी आयु के लिए कार्तिक मास की चतुर्थी पर व्रत

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वट सावित्री व्रत कथा 

    वट सावित्री व्रत कथा   सतीश शर्मा   ज्येष्ठ अमावस्या के दिन आने वाले सावित्री व्रत की कथा में निम्न प्रकार से है-भद्र देश के एक राजा थे नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान नही थी। वे संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोचारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुत सम्बद्ध मंत्र

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अर्गला स्त्रोत्र 

अर्गला स्त्रोत्र  ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते | जयन्ती’ – सबसे उत्कृष्ट एवं विजय शालिनी ।अपने भक्तों के जन्म-मरण आदि संसार-बन्धन को दूर करती हैं, उन मोक्ष दायिनी मंगलमयी देवी का नाम ‘मंगला’ है । जो प्रलयकाल में सम्पूर्ण सृष्टि को अपना ग्रास बना लेती है; वह

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